Best Shayari In Hindi

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Shayari In Hindi

आजकल हम बड़े खामोश रहते है,
होंठ अब उनकी नज़्म नही गुनगुनाते.

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एक जमाना था
जब उनके जिक्र से
हम तितली से झूम उठते
शर्म आँखों पर हावी होती
और मस्ती में खिले होंठ
दाँतों तले दब जाते!

धीरे धीरे इन सूखे होठों को
यादों की सुर्खियाँ लिपटी
जज़्बात सिकुड़ से गए
और निर्मोह चुप्पी से बंधे होंठ
दाँतों तले दब गए!

आँखों से बहते पानी में
गालों की रंगत धूल गयी
कुछ साफ नजर आ गया
सच्चाई के खारे आँसू पीते पीते
होंठ दाँतों तले दबते रहे!

फिर भी न जाने क्यों
एक अजीब सी खुशी होठों पर है
वो खामोश जरूर है
पर अपनी ही धुन में मसरूर है !

महके तनसे खुशबू छीनो
गीले लबों से लाली छीनो
मुझसे तुम मुझी को छीनो
पर आँखोंसे अपनी तस्वीर ना छीनो!
– स्वरा.

वो मीठी सी खुशबू
वो तड़के का जायका
आज भी याद हैं मुझे
रसोई से सजा मायका! वो चाय की ललक
वो दूध की मलाई
तजुर्बे से छानती
माँ की नाजुक कलाई!

वो चावल की सफेदी
वो सब्जी हरियाली
पर सारे रंगों से सुहानी
माँ के बिंदी की लाली

वो चमकता पतीला
वो इतराती कढ़ाई
चम्मच के गिरने पर
माँ से हुई लड़ाई

कैसे भुलाऊँ वो बातें
वो रसीले दिनरात
जिनमे आजभी पनपता हैं
माँ के हाथों का स्वाद.
– स्वरा.

Shayari In Hindi Text

लब ये कहते पिया,
धकधक धड़के जिया,
संग तेरे जो हो लिया,
अंग अंग महके पिया!

ये हवा काबू न हो पायी,
जुल्फोंको बिखरने से रोक न पायी,
ये हया भी छूप न पायी,
इश्क को छलकने से रोक न पायी.

वो लम्हें भी क्या लम्हें थे
जिंदगी गुलज़ार थी और हम परिंदे थे !
पंख यूँ फैलाते, गिरते, उभरते,
जिंदगी मासूम थी और हम बेफिक्र थे !

वो लम्हें भी क्या लम्हें थे
जिंदगी चाहत थी और हम चहिते थे
इश्क़ में डूबते, लुढकते, संभलते,
जिंदगी चूमसी लेती और हम इतराते थे !

ये लम्हें भी क्या लम्हें हैं
जिंदगी बदली हैं और हम बेबस हैं !
खुद को सुलझते, समझते, सँवारते,
जिंदगी उलझाती हैं और हम जीतते हैं !

वो लम्हें भी क्या लम्हें हैं
जिंदगी मस्त हैं और हम मतवाले हैं !
रंगों में रंग जाते, थमते, बटोरते,
जिंदगी शाम हैं और हम सुकून हैं !
– स्वरा बापट.

ना जाने क्यों ये जुल्फ लहराती हैं
ना जाने क्यों ये साँसे महकती हैं
आगाज हैं ये तेरे इश्क़ की
या फकत कल्पना किसी शायर की…

नींद चुराए सूरत ये प्यारी
प्यास बढ़ाये होटों की लाली
होश उड़ाए आँखे कजरारी
मन में समाए कानों की बाली
तो…
आगाज समझो ये प्यारी प्यारी
प्यार के मौसम की फैली लाली
सपनों से सजी रातें कजरारी
खुदी से बेखुदी का सफर… कराये ये बाली.
– स्वरा बापट.

वो रेशमी एहसास,
वो मखमली नाज़,
तेरी कहानी बयाँ करे,
तेरा रूहानी लिबास!

वो दिल की मिठास,
वो हौसला-ए-साँस,
तेरी कहानी बयाँ करे,
तेरा रूहानी लिबास!

वो बुलंद आगाज,
वो मेहनत-ए-मेराज,
तेरी कहानी बयाँ करे,
तेरा रूहानी लिबास!

वो जीत का राज,
वो कामयाबी का ताज,
तेरी कहानी बयाँ करे,
तेरा रूहानी लिबास!
– स्वरा बापट.

यूँ नजर से बात की,
और दीवाना कर गए,
हम तो गुम थे आवारगी में,
रफ्ता रफ्ता बेखुद हो गए…!

जब लफ्जों से मुलाकात हुई न थी,
और दिल में एक आवाज दबी सी थी,
एक मोड़ पर तकदीर ले आयी,
जिस पर रुके तो थे पर ठहर न सके
एक अलग पहचान बुला जो रही थी…!

रंगीली ये अदा,
महकी ये फिजा,
मदहोशी बढ़ाये,
साज ये नया.

जो अपना नहीं था, वो दूर चला गया,
उलझी जिंदगी को हसीन कर गया,
हम भी सुलझे बीती बातोंसे उभर कर,
फासलों ने हमें कितना सयाना कर दिया !
– स्वरा बापट.

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